Virāṭa-parva Adhyāya 29 — Suśarmā’s Counsel and the Coordinated Goharaṇa Plan
नावज्ञेयो रिपुस्तात प्राकृतोडपि बुभूषता । कि पुन: पाण्डवास्तात सर्वास्त्रकुशला रणे,“तात! जिसे सम्राट् बननेकी इच्छा हो, उसे साधारण शत्रुकी भी अवहेलना नहीं करनी चाहिये। फिर जो युद्धमें सम्पूर्ण अस्त्र-शस्त्रोंक संचालनमें कुशल हैं, उन पाण्डवोंकी तो बात ही क्या है?
তাত! যিজনে ৰাজ্যলাভৰ আকাঙ্ক্ষা কৰে, সি সাধাৰণ শত্রুকো অবজ্ঞা কৰা উচিত নহয়; তেন্তে ৰণত সৰ্বাস্ত্ৰত কুশলী পাণ্ডৱসকলৰ কথা ক’বই বা কিয়!
वैशम्पायन उवाच