Virāṭa-parva Adhyāya 22 — Draupadī’s Abduction Attempt and Bhīma’s Suppression of the Kīcakas
अद्य त्वां भगिनी पाप॑ कृष्यमाणं मया भुवि | द्रक्ष्यतेडद्रिप्रतिकाशं सिंहेनेव महागजम्,“अरे! तू पर्वतके समान विशालकाय है, तो भी जैसे सिंह महान् गजराजको घसीटता है, उसी प्रकार आज मैं तुझ पापीको पृथ्वीपर पटककर घसीटूँगा और तेरी बहिन यह सब देखेगी
adya tvāṃ bhagini pāpa kṛśyamāṇaṃ mayā bhuvi | drakṣyate ’dripratikāśaṃ siṃheneva mahāgajam ||
হে পাপী! আজি তোৰ ভনী দেখিব—তই পাহাৰসম ডাঙৰ হ’লেও—যেনে সিংহে মহাগজক টানি নিয়ে যায়, তেনেকৈ মই তোকে মাটিত আছাড় মাৰি টানি লৈ যাম।
वैशम्पायन उवाच