द्रौपदी-भीमसेनसंवादः
Draupadī–Bhīmasena Dialogue on Suffering, Kāla, and Daiva
त्वय्येवं निरयं प्राप्ते भीमे भीमपराक्रमे । शोके यौधिष्ठिरे मग्ना नाहं जीवितुमुत्सहे,भीम! भयंकर पराक्रम दिखानेवाले होकर भी तुम ऐसे नरकतुल्य कष्ट भोग रहे हो और उधर महाराज युधिष्ठिरको भी भारी शोक सहन करना पड़ता है। इस प्रकार मैं दु:खके समुद्रमें डूबी हुई हूँ। अब मुझे जीवित रहनेका तनिक भी उत्साह नहीं है
tvayy evaṁ nirayaṁ prāpte bhīme bhīmaparākrame | śoke yauḍhiṣṭhire magnā nāhaṁ jīvitum utsahe ||
হে ভীম, ভয়ংকৰ পৰাক্ৰমশালী! তুমি এনেকৈ নৰকসম দুখত পতিত; আৰু আনফালে যুধিষ্ঠিৰ শোকত নিমগ্ন। মই দুখ-সাগৰত ডুবি আছোঁ—এতিয়া বাঁচিবলৈ লেশমাত্ৰও উৎসাহ নাই।
वैशम्पायन उवाच