यक्षोपाख्यान-प्रवेशः
Entry into the Yakṣa-Lake Episode
मार्कण्डेय उवाच सा ब्रहि विस्तरेणेति पित्रा संचोदिता शुभा | तदैव तस्य वचन प्रतिगृहोदमब्रवीत्,मार्कण्डेयजी कहते हैं--युधिष्ठिर! पिताके यह कहनेपर कि “बेटी! तू अपनी यात्राका वृतान्त विस्तारके साथ बतला' शुभलक्षणा सावित्री उनकी आज्ञा मानकर उस समय इस प्रकार बोली
মাৰ্কণ্ডেয়ে ক’লে—হে যুধিষ্ঠিৰ! পিতাই “কন্যে, তোমাৰ যাত্ৰাৰ বৃত্তান্ত বিস্তাৰে কোৱা” বুলি কোৱাত, শুভলক্ষণী সাবিত্ৰীয়ে সেই আজ্ঞা গ্ৰহণ কৰি তৎক্ষণাৎ এইদৰে ক’লে।
मार्कण्डेय उवाच