दुर्योधनस्य प्रायोपवेशः — शकुनिसान्त्वनम् तथा कृत्याह्वानम्
Duryodhana’s Fast: Śakuni’s Consolation and the Summoning of a Kṛtyā
उपायो<यं मया दृष्टो गमनाय निरामय: । अनुज्ञास्यति नो राजा बोधयिष्यति चाप्युत,'द्वैतवनमें जानेका यह उपाय मुझे सर्वथा निर्दोष दिखायी दिया है। इसके लिये राजा धृतराष्ट्र हमें अवश्य आज्ञा दे देंगे और वहाँ जाकर हमें क्या-क्या करना चाहिये--इसके विषयमें कुछ समझायेंगे भी
দ্বৈতবনলৈ যোৱাৰ এই উপায়টো মোৰ দৃষ্টিত সম্পূৰ্ণ নিৰ্দোষ যেন লাগিছে। ৰজা ধৃতৰাষ্ট্ৰে নিশ্চয়েই আমাক অনুমতি দিব আৰু তাত গৈ কি কি কৰা উচিত সেয়াও বুজাই দিব।
वैशम्पायन उवाच