अग्निनाम-वंश-निरूपणम् | Agni-Names and Lineage Enumeration
सर्व व्याप्तमिदं ब्रह्मन् प्राणिभि: प्राणिजीवनै: । मत्स्यान ग्रसन्ते मत्स्याश्न तत्र कि प्रतिभाति ते,'जीवोंसे ही जीवन-निर्वाह करनेवाले जीवोंद्वारा यह सारा जगत् व्याप्त है। मत्स्य मत्स्योंतकको अपना ग्रास बना लेते हैं। उनके विषयमें आप क्या समझते हैं?
মাৰ্কণ্ডেয় ক’লে—হে ব্ৰাহ্মণ! প্ৰাণীৰ ওপৰতে জীৱন নিৰ্ভৰ কৰা প্ৰাণীৰে এই সমগ্ৰ জগত্ ব্যাপ্ত। মাছেই মাছক গিলি পেলায়। তেন্তে এই বিষয়ত তোমাৰ কি বোধ হয়?
मार्कण्डेय उवाच