मार्कण्डेय उवाच बाढमित्येव तं विप्रो हृष्टो वचनमत्रवीत् । अग्रतस्तु द्विजं कृत्वा स जगाम गृहं प्रति,मार्कण्डेयजी कहते हैं--युधिष्ठिर! यह सुनकर ब्राह्मणको बड़ा हर्ष हुआ। उसने व्याधसे कहा--“बहुत अच्छा, ऐसा ही करो।” तब व्याध ब्राह्मगको आगे करके घरकी ओर चला
মাৰ্কণ্ডেয় ক’লে—যুধিষ্ঠিৰ! এই কথা শুনি ব্ৰাহ্মণজন অতি আনন্দিত হ’ল। তেওঁ ব্যাধক ক’লে—“ভাল, তেন্তে তেনেকৈয়ে হওক।” তাৰ পাছত ব্যাধে ব্ৰাহ্মণক আগত ৰাখি ঘৰলৈ গ’ল।
मार्कण्डेय उवाच