Kubera’s Fivefold Nīti and Protection of the Pāṇḍavas (वैश्रवणोपदेशः)
उस पर्वतके ऊपर बहुत-सी अत्यन्त दुर्गम गुफाएँ थीं और अनेक दुर्गम्य प्रदेश थे। पाण्डव उन सबको सुखपूर्वक लाँचकर आगे बढ़ गये। पुरोहित धौम्य, द्रौपदी, चारों पाण्डव तथा महर्षि लोमश--ये सब लोग एक साथ चल रहे थे। कोई पीछे नहीं छूटता था ।। ते मृगद्धिजसंघुष्टं नानाद्रुमलतायुतम् | शाखामृगगणैश्वैव सेवितं सुमनोरमम्,आगे बढ़ते हुए वे महाभाग पाण्डव पुण्यमय माल्यवान् नामक महान पर्वतपर जा पहुँचे, जो अनेक प्रकारके वृक्षों और लताओंसे सुशोभित तथा अत्यन्त मनोरम था। वहाँ मृगोंके झुंड विचरते और भाँति-भाँतिके पक्षी कलरव कर रहे थे। बहुत-से वानर भी उस पर्वतका सेवन करते थे। उसके शिखरपर कमलमण्डित सरोवर, छोटे-छोटे जलकुण्ड और विशाल वन थे
te mṛgadvija-saṅghuṣṭaṃ nānā-druma-latā-yutam | śākhā-mṛga-gaṇaiś caiva sevitaṃ su-manoramam ||
সেই স্থান মৃগ আৰু পক্ষীৰ কলৰৱে মুখৰিত আছিল, নানা গছ-লতাৰে সুশোভিত, আৰু বানৰদলে বিচৰণ কৰাত অতিশয় মনোৰম হৈ উঠিছিল।
वैशम्पायन उवाच