Kubera’s Arrival and the Disclosure of Agastya’s Curse
Vaiśaṃpāyana–Janamejaya Narrative
प्रातिष्ठत स दुष्टात्मा त्रीन् गृहीत्वा च पाण्डवान् | सहदेवस्तु यत्नेन ततो5पक्रम्य पाण्डव:,शत्रुसूदन! हिंसक पशुओंको मारनेके लिये भीमसेनके आश्रमसे बाहर चले जानेपर उस राक्षसने देखा कि घटोत्कच अपने सेवकोंसहित किसी अज्ञात दिशाको चला गया, लोमश आदि महर्षि ध्यान लगाये बैठे हैं तथा दूसरे तपोधन स्नान करने और फूल लानेके लिये कुटियासे बाहर निकल गये हैं, तब उस दुष्टात्माने विशाल, विकराल एवं भयंकर दूसरा रूप धारण करके पाण्डवोंके सम्पूर्ण अस्त्र-शस्त्र, द्रौपदी तथा तीनों पाण्डवोंको भी लेकर वहाँसे प्रस्थान कर दिया। उस समय पाण्डु-कुमार सहदेव प्रयत्न करके उस राक्षसकी पकड़से छूट गये और पराक्रम करके म्यानसे निकली हुई अपनी तलवारको भी उससे छुड़ा लिया। फिर वे महाबली भीमसेन जिस मार्गसे गये थे, उधर ही जाकर उन्हें जोर-जोरसे पुकारने लगे
vaiśampāyana uvāca | prātiṣṭhata sa duṣṭātmā trīn gṛhītvā ca pāṇḍavān | sahadevas tu yatnena tato 'pakramya pāṇḍavaḥ śatrusūdana |
বৈশম্পায়নে ক’লে—সেই দুষ্টাত্মা ৰাক্ষসে তিনিজন পাণ্ডৱক ধৰি লৈ প্ৰস্থান কৰিলে। কিন্তু পাণ্ডৱ সহদেৱে যತ್ನ কৰি তাৰ ধৰা পৰা নিজকে মুক্ত কৰিলে আৰু পৰাক্ৰমে মিয়ানৰ পৰা ওলোৱা নিজৰ তৰোৱালখনো উদ্ধাৰ কৰিলে। তাৰ পাছত মহাবলী ভীমসেন যি পথেদি গৈছিল, সেই পথেদিয়েই দৌৰি গৈ উচ্চস্বৰে তেওঁক মাতিলে।
वैशम्पायन उवाच