उदपाना: कुरुश्रेष्ठ तथैवाप्यम्बरीषका: । समन्तात् क्रोशमात्रं च कारिता विषमा च भू:,कुरुश्रेष्ठ! द्वारकापुरीके चारों ओर एक कोसतकके चारों ओरके कुएँ इस प्रकार जलशून्य कर दिये गये थे मानो भाड़ हों और उतनी दूरकी भूमि भी लौहकण्टक आदिसे व्याप्त कर दी गयी थी
হে কুরুশ্ৰেষ্ঠ! চাৰিওফালে এক ক্রোশ পৰ্যন্ত কূপ আৰু জলাশয় শুকুৱাই দিয়া হৈছিল; আৰু ততদূৰলৈ ভূমিও দুৰ্গম কৰি তোলা হৈছিল।
वायुदेव उवाच