Adhyāya 136: Yavakrī–Bharadvāja Saṃvāda and the Bāladhī–Dhanuṣākṣa Gāthā
Arrogance, Boons, and Nimitta
यवक्रीत उवाच प्रतिभास्यन्ति वै वेदा मम तातस्य चोभयो: । अति चान्यान् भविष्यावो वरा लब्धास्तदा मया,यवक्रीतने कहा--पिताजी! आपको और मुझे दोनोंको ही सम्पूर्ण वेदोंका ज्ञान हो जायगा। साथ ही हम दोनों दूसरोंसे ऊँची स्थितिमें हो जायँगे--ऐसा वर मैंने प्राप्त किया है
যৱক্ৰীতে ক’লে—পিতাজী! আপোনাক আৰু মোক—আমাৰ দুয়োৰে—সম্পূৰ্ণ বেদজ্ঞান লাভ হ’ব। লগতে আমি দুয়ো আনসকলতকৈ উচ্চ স্থিতিত প্ৰতিষ্ঠিত হ’ম—এমন বৰ মই লাভ কৰিছোঁ।
यवक्रीत उवाच