Adhyāya 136: Yavakrī–Bharadvāja Saṃvāda and the Bāladhī–Dhanuṣākṣa Gāthā
Arrogance, Boons, and Nimitta
रैभ्यो विद्वान् सहापत्यस्तपस्वी चेतरो5भवत् | तयाश्षाप्यतुला कीर्तिबल्यात् प्रभृति भारत,भारत! पुत्रोंसहित रैभ्य बड़े विद्वान थे, परंतु भरद्वाज केवल तपस्यामें संलग्न रहते थे। युधिष्ठिर! बाल्यावस्थासे ही इन दोनों महात्माओंकी अनुपम कीर्ति सब ओर फैल रही थी
হে ভাৰত! পুত্ৰসহ ৰৈভ্য আছিল মহাবিদ্বান; আৰু আনজন ভৰদ্বাজ আছিল তপস্যাত নিমগ্ন তপস্বী। যুধিষ্ঠিৰ! শৈশৱৰে পৰা সেই দুয়ো মহাত্মাৰ অতুল কীৰ্তি দহ দিশত বিস্তাৰিত হৈছিল।
लोमश उवाच