सहदेव–सात्यकि संवादः
Sahadeva and Satyaki on resolve after failed conciliation
तस्मिंस्तस्मिन् निमित्ते हि मतं भवति केशव । प्राप्तकालं मनुष्येण क्षमं कार्यमरिंदम,शत्रुओंका दमन करनेवाले केशव! भिन्न-भिन्न कारण उपस्थित होनेपर मनुष्योंके विचार भी भिन्न-भिन्न प्रकारके हो जाते हैं; अतः मनुष्यको वही कार्य करना चाहिये, जो उसके योग्य और समयोचित हो
হে শত্রুদমনকাৰী কেশৱ! নানা কাৰণ উপস্থিত হ’লে মানুহৰ মত-চিন্তাও নানা ধৰণৰ হৈ পৰে; সেয়ে মানুহে নিজৰ যোগ্যতা আৰু সময়োচিত যি কৰ্ম, সেইটোৱেই কৰা উচিত।
नकुल उवाच