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Shloka 1

धृतराष्ट्रस्य संजयप्रश्नः

Dhṛtarāṣṭra’s Inquiry to Saṃjaya on Strategic Comparisons

अपन का छा है >> टल्टओं षट्षष्टितमो<5 ध्याय: संजयका धृतराष्ट्रको अर्जुनका संदेश सुनाना वैशम्पायन उवाच एवमुकक्‍्त्वा महाप्राज्ञो धृतराष्ट्र: सुयोधनम्‌ | पुनरेव महा भाग: संजयं पर्यपृच्छत,वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! दुर्योधनसे ऐसा कहकर परम बुद्धिमान महाभाग धृतराष्ट्रने संजयसे पुनः प्रश्न किया--

বৈশম্পায়ন ক’লে—জনমেজয়! সুয়োধনক এইদৰে কৈ, পৰম প্ৰাজ্ঞ মহাভাগ ধৃতৰাষ্ট্ৰে পুনৰ সঞ্জয়ক প্ৰশ্ন কৰিলে।

वैशम्पायन उवाच