अध्याय ४६ — सभाप्रवेशः तथा सञ्जयस्य दूतवृत्तान्तः
Entry into the Royal Assembly and Sañjaya’s Envoy Report
शुश्रूषमाणा: पार्थानां वाचो धर्मार्थसंहिता: । धृतराष्ट्रमुखा: सर्वे ययू राजसभां शुभाम्,धृतराष्ट्र आदि समस्त कौरवोंने भी पाण्डवोंकी धर्मार्थयुक्त बातें सुननेकी इच्छासे उस सुन्दर एवं विशाल राजसभामें प्रवेश किया, जो चूनेसे पुती होनेके कारण अत्यन्त उज्ज्वल दिखायी देती थी। सुवर्णमय प्रांगण उसकी शोभा बढ़ा रहे थे। वह सभा चन्द्रमाकी श्वेत रश्मियोंके समान प्रकाशित हो रही थी। वह देखनेमें अत्यन्त मनोहर थी और उसके भीतर चन्दनमिश्रित जलसे छिड़काव किया गया था
śuśrūṣamāṇāḥ pārthānāṃ vāco dharmārthasaṃhitāḥ | dhṛtarāṣṭramukhāḥ sarve yayū rājāsabhāṃ śubhām ||
পার্থসকলৰ ধৰ্মাৰ্থসংহিত বাক্য শুনিবলৈ ইচ্ছা কৰি, ধৃতৰাষ্ট্ৰক অগ্ৰে ৰাখি সকলোৱে শুভ ৰাজসভালৈ গ’ল।
वैशम्पायन उवाच