Udyoga-parva Adhyāya 28: Dharmādharmalakṣaṇa in Āpad
Crisis-Discernment of Right and Wrong
गान्धारराज: शकुनिर्निकृत्या यदब्रवीद् द्यूतकाले स पार्थम् पराजितो नन्दन: कि तवास्ति कृष्णया त्वं दीव्य वै याज्ञसेन्या,गान्धारराज शकुनिने द्यूतक्रीड़ाके समय कुन्तीनन्दन युधिष्ठिरसे शठतापूर्वक यह बात कही थी कि अब तो तुम अपने छोटे भाईको भी हार गये, अब तुम्हारे पास क्या है? इसलिये इस समय तुम द्रुपदनन्दिनी कृष्णाको दाँवपर रखकर जूआ खेलो
gāndhārarājaḥ śakunir nikṛtyā yad abravīd dyūtakāle sa pārtham | parājito nandanaḥ kiṃ tavāsti kṛṣṇayā tvaṃ dīva vai yājñasenyā ||
বায়ুৱে ক’লে— “দ্যূতকালত গন্ধাৰরাজ শকুনিয়ে ছল কৰি পাৰ্থক ক’লে— ‘হে পুত্ৰ, তুমি পৰাজিত; এতিয়া তোমাৰ ওচৰত কি আছে? সেয়ে যাজ্ঞসেনীৰ কন্যা কৃষ্ণাক পণত থৈ খেল।’”
वायुदेव उवाच