Udyoga Parva, Adhyaya 2 — Baladeva’s Counsel on Peace, Restitution, and Court Protocol
इस प्रकार श्रीमह्ा भारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत सेनोट्रोगपर्वमें (दुपदके) पुरोहितका यात्राविषयक पहला अध्याय पूरा हुआ,ऑपन--माजल बछ। अकाल द्वितीयो&्ध्याय: बलरामजीका भाषण बलदेव उवाच श्रुतं भवद्धिर्गदपूर्वजस्य वाक््यं यथा धर्मवर्दर्थवच्च । अजातशशभत्रोश्ष हित॑ हितं च दुर्योधनस्यापि तथैव राज्ञ: बलदेवजी बोले--सज्जनो! गदाग्रज श्रीकृष्णने जो कुछ धर्मानुकूल तथा अर्थशास्त्रसम्मत सम्भाषण किया है, उसे आप सब लोगोंने सुना है। इसीमें अजातशत्रु युधिष्ठिरका भी हित है तथा ऐसा करनेसे ही राजा दुर्योधनकी भलाई है
baladeva uvāca | śrutaṃ bhavadbhir gadāpūrvajasya vākyaṃ yathā dharmavad arthavac ca | ajātaśatroś ca hitaṃ hitaṃ ca duryodhanasyāpi tathaiva rājñaḥ ||
বলদেৱে ক’লে—সজ্জনসকল, গদাধাৰী শ্ৰীকৃষ্ণৰ অগ্ৰজে কোৱা ধৰ্মসন্মত আৰু অৰ্থনীতিসন্মত বাক্য তোমালোকে শুনিছা। তাতেই অজাতশত্ৰু যুধিষ্ঠিৰৰ হিত আছে; আৰু তেনেদৰে ৰজা দুর্যোধনৰো কল্যাণ আছে।
श्रीकृष्ण उवाच