अम्बा–राम–भीष्म संवादः
Amba–Rama–Bhishma Dialogue on Vow and Refuge
न हि बाणा मयोत्सृष्टा: सज्जन्तीह शरीरिणाम् । कायेषु विदितं तुभ्य॑ पुरा क्षत्रियसंगरे,मेरे चलाये हुए बाण देहधारियोंके शरीरमें अटकते नहीं हैं। (उन्हें विदीर्ण करके बाहर निकल जाते हैं।) यह बात तुम्हें पूर्वकालमें क्षत्रियोंक साथ होनेवाले युद्धके समय ज्ञात हो चुकी है
মই নিক্ষেপ কৰা বাণ দেহধাৰীৰ শৰীৰত অটকি নাথাকে; ভেদ কৰি বাহিৰলৈ ওলাই যায়। এই কথা তোৰ আগতেই ক্ষত্ৰিয়-সঙ্গ্ৰামত জনা হৈছিল।
राम उवाच