Nahūṣa’s Fall Explained: Agastya’s Account to Indra (Śalya-narrated)
विश्वरूपविनाशेन वृत्रासुरवधेन च । दिष्ट्याद्य नहुषो भ्रष्टो देवराज्यात् पुरंदर । दिष्ट्या हतारिं पश्यामि भवन्तं बलसूदन,शल्य कहते हैं--युधिष्ठटि! जिस समय बुद्धिमान् देवराज इन्द्र देवताओं तथा लोकपालोंके साथ बैठकर नहुषके वधका उपाय सोच रहे थे, उसी समय वहाँ तपस्वी भगवान् अगस्त्य दिखायी दिये। उन्होंने देवेन्द्रकी पूजा करके कहा--'सौभाग्यकी बात है कि आप विश्वरूपके विनाश तथा वृत्रासुरके वधसे निरन्तर अभ्युदयशील हो रहे हैं। बलसूदन पुरंदर! यह भी सौभाग्यकी ही बात है कि आज नहुष देवताओंके राज्यसे भ्रष्ट हो गये। बलसूदन! सौभाग्यसे ही मैं आपको शत्रुहीन देख रहा हूँ!
viśvarūpavināśena vṛtrāsuravadhena ca | diṣṭyādya nahuṣo bhraṣṭo devarājyāt puraṃdara | diṣṭyā hatāriṃ paśyāmi bhavantaṃ balasūdana ||
“বিশ্বৰূপৰ বিনাশ আৰু বৃত্ৰাসুৰ-বধৰ দ্বাৰা আপুনি অভ্যুদয়শীল—ই দিষ্টি। হে পুরন্দৰ! আজি নহুষ দেৱৰাজ্যৰ পৰা ভ্ৰষ্ট হোৱাো দিষ্টি। হে বলসূদন! দিষ্টিবশত মই আপোনাক শত্রুহীন দেখি আছোঁ।”
शल्य उवाच