Vidurā–Putra Saṃvāda: Utsāha, Kīrti, and Kṣātra Resolve
Udyoga-parva 131
न होतामाशिषं पाण्डुर्न चाहं न पितामह: । प्रयुक्तवन्त: पूर्व ते यया चरसि मेधया,तुम जिस बुद्धिके सहारे चलते हो, उसके लिये न तो तुम्हारे पिता पाण्डुने, न मैंने और न पितामहने ही पहले कभी आशीर्वाद दिया था (अर्थात् तुममें वैसी बुद्धि होनेकी कामना किसीने नहीं की थी)
যি মেধাৰ জোৰত তুমি চলা, তাৰ বাবে আগতে না তোমাৰ পিতা পাণ্ডুৱে, না মই, না পিতামহে—কোনেও আশীৰ্বাদ দিয়া নাছিল; অৰ্থাৎ তেনে বুদ্ধি তোমাত থাকক বুলি কোনোেও কামনা কৰা নাছিল।
वायुदेव उवाच