Vāmadeva’s Rājadharma: Norm-Setting, Counsel, and the Prevention of Rāṣṭra-Vināśa (वामदेव-प्रोक्तं राजधर्मम्)
मरणान्तमिदं सर्व नेह किज्चिदनामयम् | तस्माद् धर्मे स्थितो राजा प्रजा धर्मेण पालयेत्,राजन्! इस जगत्के सभी पदार्थ अन्तमें नष्ट होनेवाले हैं; यहाँ कोई भी वस्तु नीरोग या अविनाशी नहीं है। इसलिये राजाको धर्मपर स्थित रहकर प्रजाका धर्मके अनुसार ही पालन करना चाहिये
ৰাজন! এই জগতৰ সকলো বস্তু শেষত মৃত্যুৰ অধীন; ইয়াত একোৱেই নিৰাময় বা অবিনাশী নহয়। সেয়ে ৰজাই ধৰ্মত স্থিত হৈ ধৰ্মানুসাৰে প্ৰজাক পালন কৰিব লাগে।
वामदेव उवाच