विमानितो हतः क्रुष्टस्त्रातारं चेन्न विन्दति । अमानुषकृतत्तत्र दण्डो हन्ति नराधिपम्,यदि अपमानित, हताहत तथा गाली-गलौजसे तिरस्कृत होनेवाला दुर्बल मनुष्य राजाको अपने रक्षकके रूपमें नहीं उपलब्ध कर पाता तो वहाँ दैवका दिया हुआ दण्ड राजाको मार डालता है
যদি অপমানিত, আঘাতপ্ৰাপ্ত আৰু ক্ৰুদ্ধ দুৰ্বল মানুহে ৰক্ষক নাপায়, তেন্তে তাত দেৱপ্ৰেৰিত অমানুষ দণ্ডে ৰজাকেই বিনাশ কৰে।
उतथ्य उवाच