राष्ट्रगुप्ति-संग्रहः
Protection of the Realm and Principles of Revenue & Local Administration
ग्रामीयान् ग्रामदोषांश्व ग्रामिकः प्रतिभावयेत् । तान् ब्रूयाद् दशपायासौ स तु विंशतिपाय वै,गाँवके स्वामीका यह कर्त्तव्य है कि वह गाँववालोंके मामलोंका तथा गाँवमें जो-जो अपराध होते हों, उन सबका वहीं रहकर पता लगावे और उनका पूरा विवरण दस गाँवके अधिपतिके पास भेजे। इसी तरह दस गाँवोंवाला बीस गाँववालेके पास और बीस गाँवोंवाला अपने अधीनस्थ जनपदके लोगोंका सारा वृत्तान्त सौ गाँवोंवाले अधिकारीको सूचित करे। (फिर सौ गाँवोंका अधिकारी हजार गाँवोंके अधिपतिको अपने अधिकृत क्षेत्रोंकी सूचना भेजे। इसके बाद हजार गाँवोंका अधिपति स्वयं राजाके पास जाकर अपने यहाँ आये हुए सभी विवरणोंको उसके सामने प्रस्तुत करे)
bhīṣma uvāca | grāmīyān grāmadoṣāṁś ca grāmikaḥ pratibhāvayet | tān brūyād daśapāyāsau sa tu viṁśatipāya vai |
ভীষ্মে ক’লে—গাঁওমুখীয়াই গাঁওবাসীৰ আচাৰ-ব্যৱহাৰ আৰু গাঁৱত উদ্ভৱ হোৱা দোষ-অপৰাধ সাৱধানে অনুসন্ধান কৰি জানিব লাগে। তাৰ পিছত সেই বিৱৰণ দহ গাঁৱৰ অধিপতিক জনাব; আৰু দহ গাঁৱৰ অধিপতিয়ে সেয়া বিশ গাঁৱৰ অধিপতিলৈ পঠিয়াব। এইদৰে স্তৰক্রমে তদাৰকিৰে স্থানীয় আচৰণ আৰু অপৰাধৰ সংবাদ ওপৰলৈ গৈ, শাসন অবহেলাত নহয়—যথাৰ্থ জ্ঞান আৰু সময়োচিত সংশোধনত প্ৰতিষ্ঠিত হয়।
भीष्म उवाच