धन-राजधर्म संवादः
Discourse on Wealth and Royal Duty
अपन करा बछ। अं अष्टमो> ध्याय: अर्जुनका युधिष्ठिरके मतका निराकरण करते हुए उन्े धनकी महत्ता बताना और राजधर्मके पालनके जोर देते हुए यज्ञानुष्ठानके लिये प्रेरित करना वैशम्पायन उवाच अथार्जुन उवाचेदमधिक्षिप्त इवाक्षमी । अभिनीततरं वाक््यं दृढवादपराक्रम:,वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! युधिष्ठिरकी यह बात सुनकर अर्जुन इस प्रकार असहिष्णु हो उठे, मानो उनपर कोई आशक्षेप किया गया हो। वे बातचीत करने या पराक्रम दिखानेमें किसीसे दबनेवाले नहीं थे। उनका पराक्रम बड़ा भयंकर था। वे महातेजस्वी इन्द्रकुमार अपने उम्ररूपका परिचय देते और दोनों गलफरोंको चाटते हुए मुसकराकर इस तरह गर्वयुक्त वचन बोलने लगे, जैसे नाटकके रंगमंचपर अभिनय कर रहे हों
vaiśampāyana uvāca—athārjuna uvācedam adhikṣipta ivākṣamī | abhinītataram vākyam dṛḍhavāda-parākramaḥ ||
বৈশম্পায়ন ক’লে—হে জনমেজয়! যুধিষ্ঠিৰৰ কথা শুনি অৰ্জুন সহ্য কৰিব নোৱাৰিলে, যেন তেওঁৰ ওপৰতে আক্ষেপ কৰা হৈছে। দৃঢ়বাদী আৰু ভয়ংকৰ পৰাক্ৰমশালী তেওঁ যুধিষ্ঠিৰৰ মত তীক্ষ্ণভাৱে খণ্ডন কৰি, ৰাজধৰ্ম পালন আৰু ধৰ্মানুষ্ঠানৰ শৃঙ্খলিত সাধনাৰ ওপৰত পুনৰ জোৰ দি, মঞ্চৰ অভিনয়ৰ দৰে তীব্ৰ ভঙ্গিত কথা ক’লে।
अथार्जुन उवाचेदमधिक्षिप्त इवाक्षमी ।