Kṣātra-Dharma, Daṇḍanīti, and Social Order
Indra–Māndhātṛ Dialogue
इन्द्र उवाच असैनिका धर्मपराश्ष धर्मे परां गति न नयन्ते हायुक्तम् क्षात्रो धर्मो ह्यादिदेवात् प्रवृत्तः पश्चादन्ये शेषभूताश्च धर्मा:,इन्द्र बोले--राजन्! आदिदेव भगवान् विष्णुसे तो पहले राजधर्म ही प्रवृत्त हुआ है। अन्य सभी धर्म उसीके अंग हैं और उसके बाद प्रकट हुए हैं। जो सैनिक शक्तिसे सम्पन्न राजा नहीं हैं, वे धर्मपरायण होनेपर भी दूसरोंको अनायास ही धर्मविषयक परम गतिकी प्राप्ति नहीं करा सकते
indra uvāca | asainikā dharmaparāś ca dharme parāṃ gatiṃ na nayanti hy ayuktam | kṣātro dharmo hy ādidevāt pravṛttaḥ paścād anye śeṣabhūtāś ca dharmāḥ ||
ইন্দ্ৰে ক’লে— হে ৰাজন, সেনাহীন ৰজাসকল ধৰ্মপৰায়ণ হ’লেও ধৰ্মৰ জৰিয়তে অনায়াসে আনক পৰম গতিলৈ নিবলৈ সক্ষম—এমন ভাবা উচিত নহয়। কিয়নো আদিদেৱ বিষ্ণুৰ পৰা প্ৰথমে ক্ষাত্ৰধৰ্ম (ৰাজধৰ্ম) প্ৰবৃত্ত হৈছিল; বাকী সকলো ধৰ্ম তাৰেই অঙ্গ আৰু পিছত প্ৰকাশ পাইছিল।
इन्द्र उवाच