देवतापितृप्रश्नः — Nārada at Badarīāśrama: the ultimate referent of daiva and pitṛ worship
कि ते धनेन कि बन्धुभिस्ते कि ते पुत्रै: पुत्रक यो मरिष्यसि । आत्मानमन्विच्छ गुहां प्रविष्ट पितामहास्ते क्व गताश्ष सर्वे,बेटा! जब तुम्हें एक दिन मरना ही है, तब धन, बन्धु और पुत्र आदिसे तुम्हें क्या लेना है; अतः तुम हृदयरूपी गुफामें छिपे हुए आत्मतत्त्वका अनुसंधान करो। सोचो तो सही; आज तुम्हारे सारे पूर्वज--पितामह कहाँ चले गये?
ki te dhanena ki bandhubhis te ki te putraiḥ putraka yo mariṣyasi | ātmānam anviccha guhāṁ praviṣṭa pītāmahās te kva gatāś ca sarve ||
বৎস! যেতিয়া তোমাক একদিন মৰিবই লাগিব, তেতিয়া ধন কিহৰ কাম? আত্মীয়-স্বজন কিহৰ কাম? পুত্ৰসন্তান কিহৰ কাম? সেয়ে হৃদয়-গুহাত প্ৰৱিষ্ট আত্মতত্ত্বৰ অনুসন্ধান কৰা। চিন্তা কৰা—তোমাৰ সকলো পূৰ্বপুৰুষ, পিতামহ আদি, ক’লৈ গ’ল?
व्यास उवाच