अव्यक्त-गुण-पुरुषविवेकः | Avyakta, Guṇas, and Discrimination of Puruṣa
जलोदरे तृषारोगे ज्वरगण्डे विषूचके । श्वित्रकुछेअग्निदग्थे च सिध्मापस्मारयोरपि,इसी प्रकार वह जलोदर, तृषारोग, ज्वर, गलगण्ड (गलसूआ), विषूचिका (हैजा), सफेद कोढ़, अग्निदाह, सिथ्मा- (सफेद दाग या सेहँँवा), अपस्मार (मृगी) आदि रोगोंका शिकार होता रहता है
jalodare tṛṣāroge jvara-gaṇḍe viṣūcake | śvitrakuche ’gnidagdhe ca sidhmāpas-mārayor api ||
বসিষ্ঠ ক’লে—সেও জলোদৰ, তৃষাৰোগ, জ্বৰ, গলগণ্ড, বিষূচিকা, শ্বিত্ৰকুষ্ঠ, অগ্নিদাহ, সিদ্ধ্মা আৰু অপস্মাৰ আদি বহু ভয়ংকৰ ব্যাধিত আক্রান্ত হয়।
वसिष्ठ उवाच