नारद–असित (देवल) संवादः — भूतप्रभवाप्यय, इन्द्रिय-गुण-विवेक, क्षेत्रज्ञ-तत्त्व
भीष्म उवाच उभौ धर्म महाभागावुभौ परमदुश्नरौ । उभौ महाफलौ तौ तु सद्धिराचरितावुभौ,भीष्मजीने कहा--राजन! गार्हस्थ्य और योगधर्म दोनों महान् सौभाग्य प्रदान करनेवाले हैं, दोनों अत्यन्त दुष्कर हैं। दोनोंके ही फल महान् हैं और दोनोंका ही श्रेष्ठ पुरुषोंने आचरण किया है
ভীষ্মে ক’লে— ৰাজন! গাৰ্হস্থ্যধৰ্ম আৰু যোগধৰ্ম—দুয়োটাই মহাভাগ্যদায়ক, দুয়োটাই পৰম দুষ্কৰ। দুয়োটাৰ ফল মহৎ, আৰু দুয়োটাই সৎপুৰুষে আচৰণ কৰিছে।
भीष्म उवाच