Adhyāya 241: Guṇa-sṛṣṭi, Kṣetrajña-sākṣitva, and Śama through Ātma-jñāna (गुणसृष्टिः, क्षेत्रज्ञसाक्षित्वं, शमः)
यत्र गत्वा न ग्रियते यत्र गत्वा न जायते । न पुनर्जायते यत्र यत्र गत्वा न वर्तते,“जहाँ जाकर फिर मृत्युका कष्ट नहीं उठाना पड़ता, जहाँ जानेसे फिर जन्म नहीं होता, जहाँ पुनर्जन्मका भय नहीं रहता तथा जहाँ जाकर मनुष्य फिर इस संसारमें नहीं लौटता
yatra gatvā na mriyate yatra gatvā na jāyate | na punar jāyate yatra yatra gatvā na vartate ||
সেই অৱস্থাই তেনে—য’ত গৈ পুনৰ মৃত্যু নাই, য’ত গৈ পুনৰ জন্ম নাই; তাত পুনৰ্জন্ম পুনৰাবৃত্তি নহয়, আৰু তাত উপনীত হোৱা মানুহে পুনৰ এই সংসাৰত ঘূৰি নাহে।
भीष्म उवाच