Yoga-kṛtya (योककृत्य) — Vyāsa on Sense-Restraint, Obstacles, and Brahman-Realization
विहितं कालनानात्वमनादिनिधनं तथा । कीर्तितं तत्पुरस्तात् ते तत्सूते चात्ति च प्रजा:,स्वयं ब्रह्माजीने ही सत्ययुग, त्रेता आदिके रूपमें कालभेदका विधान किया है। वह अनादि और अनन्त है। वह काल ही लोककी सृष्टि और संहार करता है। बेटा! यह बात मैं तुमसे पहले ही बता चुका हूँ
ব্যাসে ক’লে—সত্যযুগ, ত্ৰেতা আদি ৰূপে কালভেদৰ বিধান স্বয়ং ব্রহ্মাই কৰিছে; সেই কাল অনাদি আৰু অনন্ত। সেই কালেই প্ৰজাৰ সৃষ্টি কৰে আৰু সংহাৰো কৰে। বৎস! এই কথা মই তোমাক আগতেই কৈছোঁ।
व्यास उवाच