Śakra–Namuci-saṃvāda: Śoka-nivāraṇa and Daiva-vicāra
Indra and Namuci on grief, composure, and inevitability
इमां च यो वेद विमोक्षबुद्धि- मात्मानमन्विच्छति चाप्रमत्त: । न लिप्यते कर्मफलैरनिष्टै: पत्रं बिसस्येव जलेन सिक्तम्,जो इस मोक्षविद्याको जानता है और सावधानीके साथ आत्मतत्त्वका अनुसंधान करता है, वह जलसे कमलके पत्तेकी भाँति कर्मके अनिष्ट फलोंसे कभी लिप्त नहीं होता
যি এই মোক্ষবিদ্যা জানে আৰু অপ্রমত্ত হৈ আত্মতত্ত্বৰ অনুসন্ধান কৰে, সি পানীত সিক্ত পদ্মপাতৰ দৰে কৰ্মৰ অনিষ্ট ফলত কেতিয়াও লিপ্ত নহয়।
भीष्म उवाच