Adhyāya 115: On Restraint Under Verbal Provocation in the Assembly (सभायां आक्रोश-सहिष्णुता)
यदि वाग्भि: प्रयोग: स्यात् प्रयोगे पापकर्मण: । वागेवार्थों भवेत् तस्य न होवार्थों जिघांसत:,यदि पापाचारी पुरुषके कटुवचन बोलनेपर बदलेमें वैसे ही वचनोंका प्रयोग किया जाय तो उससे केवल वाणीद्वारा कलहमात्र होगा। जो हिंसा करना चाहता है, उसका गाली देनेसे कोई प्रयोजन सिद्ध नहीं होगा
yadi vāgbhiḥ prayogaḥ syāt prayoge pāpakarmaṇaḥ | vāg evārtho bhavet tasya na hovārtho jighāṃsataḥ ||
ভীষ্মে ক’লে—পাপাচাৰী মানুহৰ কটু বাক্যৰ উত্তৰত একে ধৰণৰ বাক্য প্ৰয়োগ কৰিলে ফল মাথোঁ বাক্যৰ কলহ। যি হিংসাত উদ্যত, তাক গালি দি কোনো উদ্দেশ্য সিদ্ধ নহয়।
भीष्म उवाच