Duryodhana-patana-anuśocana
The Fall of Duryodhana and the Contest of Restraint
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ श्लोक मिलाकर कुल ७२ श्लोक हैं।) अपन क्ाता छा 2 अष्टपञज्चाशत्तमो< ध्याय: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत तथा अर्नके के संकेतके अनुसार भीमसेनका गदासे दुर्योधनकी जाँघें तोड़कर उसे धराशायी करना एवं भीषण उत्पातोंका प्रकट होना संजय उवाच समुद्रीर्ण ततो दृष्ट्वा संग्रामं कुरुमुख्ययो: । अथाब्रवीदर्जुनस्तु वासुदेवं॑ यशस्विनम्,संजय कहते हैं--राजन्! कुरुकुलके उन दोनों प्रमुख वीरोंके उस संग्रामको उत्तरोत्तर बढ़ता देख अर्जुनने यशस्वी भगवान् श्रीकृष्णसे पूछा--
sañjaya uvāca
samudīrṇaṃ tato dṛṣṭvā saṅgrāmaṃ kurumukhyayoḥ |
athābravīd arjunas tu vāsudevaṃ yaśasvinam ||
সঞ্জয়ে ক’লে—হে ৰাজন! কুৰুবংশৰ সেই দুজন প্ৰধান বীৰৰ যুদ্ধ ক্ৰমে ক্ৰমে অধিক ভয়ংকৰভাৱে বৃদ্ধি পোৱা দেখি, অৰ্জুনে তেতিয়া যশস্বী বাসুদেৱ (শ্ৰীকৃষ্ণ)ক সম্বোধন কৰি ক’লে।
संजय उवाच