शल्यपरिघातः (Śalya Under Encirclement) — Mahābhārata, Śalya-parva, Adhyāya 12
तौ गदाभिह्ठ तैगत्रि: क्षणेन रुधिरोक्षितौ । प्रेक्षणीयतरावास्तां पुष्पिताविव किंशुकौ,उन दोनोंके अंगोंमें गदाकी गहरी चोटोंसे घाव हो गये थे। अतः दोनों ही क्षणभरमें खूनसे नहा गये। उस समय खिले हुए दो पलाशवृक्षोंके समान वे दोनों वीर देखने ही योग्य जान पड़ते थे
tau gadābhighātair gātreṣu kṣaṇena rudhirokṣitau | prekṣaṇīyatarāv āstāṁ puṣpitāv iva kiṁśukau ||
সঞ্জয়ে ক’লে—গদাৰ প্ৰচণ্ড আঘাতে সেই দুয়ো বীৰৰ অংগ ক্ষণতে ঘাঁয়ে ঢাক খাই ৰক্তে সিক্ত হ’ল। তথাপি তেওঁলোক পুষ্পিত কিঁশুক (পলাশ) বৃক্ষযুগলৰ দৰে অধিক দৰ্শনীয় হৈ থিয় দিলে—যুদ্ধৰ হিংসাৰ মাজতো বীৰত্বৰ ঘোৰ দীপ্তি প্ৰকাশ কৰি।
संजय उवाच