अध्याय ९ — दुर्योधनस्य अन्त्यावस्था, विलापः, तथा सौप्तिक-प्रतिवृत्तम्
Duryodhana’s Final Condition, Lamentation, and the Night’s Report
“एक तो आप रणभूमिमें अधर्मपूर्वक मारे गये। दूसरे भीमसेनने आपके मस्तकपर लात मारी। इतनेपर भी जिन्होंने उस नीचकी उपेक्षा की, उसे कोई दण्ड नहीं दिया, उन श्रीकृष्ण और युधिष्ठिरको धिक्कार है! ।। युद्धेष्वपवदिष्यन्ति योधा नूनं वृकोदरम् | यावत् स्थास्यन्ति भूतानि निकृत्या हसि पातित:,“आप धोखेसे गिराये गये हैं, अतः इस संसारमें जबतक प्राणियोंकी स्थिति रहेगी, तबतक सभी युद्धोंमें सम्पूर्ण योद्धा भीमसेनकी निन्दा ही करेंगे
sañjaya uvāca |
yuddheṣv apavadīṣyanti yodhā nūnaṃ vṛkodaram |
yāvat sthāsyanti bhūtāni nikṛtyā hṛṣi pātitaḥ ||
সঞ্জয়ে ক’লে—এফালে তুমি ৰণভূমিত অধৰ্মপূৰ্বক নিহত হ’লা; তাৰ ওপৰত ভীমসেনে তোমাৰ মূৰত লাথি মাৰিলে। তথাপি সেই নীচক দণ্ড নিদি যিয়ে উপেক্ষা কৰিলে—সেই শ্ৰীকৃষ্ণ আৰু যুধিষ্ঠিৰ ধিক্কাৰযোগ্য। সকলো যুদ্ধতে যোদ্ধাসকলে নিশ্চয় বৃকোদৰক নিন্দা কৰিব; কিয়নো যিমান দিন প্ৰাণী থাকিব, সিমান দিন স্মৰণ থাকিব—তুমি ছলনাৰে পতিত হৈ নিহত হৈছিলা।
संजय उवाच