Adhyaya 11 — Draupadī’s Grief, Demand for Justice, and Bhīma’s Departure
शिबिरात् स्वाद् गृहीत्वा स रथस्य पदमच्युत:,(द्रोणपुत्रगतेनाशु ययौ मार्गेण भारत ।) भरतनन्दन! छावनीसे बाहर निकलकर अपनी टेकसे न टलनेवाले भीमसेन अश्वृत्थामाके रथका चिह्न देखते हुए उसी मार्गसे शीघ्रतापूर्वक आगे बढ़े, जिससे द्रोणपुत्र अश्व॒त्थामा गया था
হে ভাৰতনন্দন! শিবিৰৰ পৰা বাহিৰ ওলাই, অচল প্ৰতিজ্ঞ ভীমসেনে দ্ৰোণপুত্ৰ অশ্বত্থামা যোৱা ৰথচিহ্ন দেখি, সি যি পথে গৈছিল সেই পথেই শীঘ্ৰে আগবাঢ়িল।
वैशम्पायन उवाच