धृतराष्ट्र रवाच अश्रद्धेयमिदं कर्म कृतं भीमेन संजय । यत् स नागायुतप्राण: पुत्रो मम निपातित:,धृतराष्ट्र बोले--संजय! मेरे पुत्र दुर्योधनमें दस हजार हाथियोंका बल था तो भी उसे भीमसेनने मार गिराया। उनके द्वारा जो यह कार्य किया गया है, इसपर सहसा विश्वास नहीं होता
ধৃতৰাষ্ট্ৰই ক’লে—সঞ্জয়! ভীমে কৰা এই কৰ্ম বিশ্বাস কৰিব নোৱাৰি; দহ হাজাৰ হাতীৰ বলসমান শক্তি থকা মোৰ পুত্ৰ এইদৰে নিপতিত হ’ল!
संजय उवाच