न कालो दण्डमुद्यम्य शिर: कृन्तति कस्यचित् | कालस्य बलमेतावद् विपरीतार्थदर्शनम्,काल डंडा या तलवार लेकर किसीका सिर नहीं काटता। कालका बल इतना ही है कि वह प्रत्येक वस्तुके विषयमें मनुष्यकी विपरीत बुद्धि कर देता है
na kālo daṇḍam udyamya śiraḥ kṛntati kasyacit | kālasya balam etāvad viparītārthadarśanam ||
কাল দণ্ড বা তৰোৱাল তুলি কাৰো মূৰ কাটি নধৰে। কালৰ বল ইমানেই—ই মানুহৰ বুদ্ধি উলটাই দিয়ে; হিতক অহিত আৰু অহিতক হিত বুলি দেখুৱাই তাক নিজৰেই বিনাশৰ পথলৈ ঠেলি দিয়ে।
संजय उवाच