अक्षदेवन-प्रवर्तनम् | Commencement of the Dice Game
चेकितान उपासड्ले धनु: काश्य उपाहरत् । असिं च सुत्सरुं शल्य: शैक्यं काउ्चनभूषणम्,महाबली सुनीथने बड़ी प्रसन्नताके साथ उसमें अनुकर्ष (रथके नीचे लगनेयोग्य काष्ठ) लगा दिया। चेदिराजने स्वयं उस रथमें ध्वजा फहरा दी। दक्षिणदेशके राजाने कवच दिया। मगधनरेशने माला और पगड़ी प्रस्तुत की। महान् धनुर्धर वसुदानने साठ वर्षकी अवस्थाका एक गजराज उपस्थित कर दिया। मत्स्यनरेशने सुवर्णजटित धुरी ला दी। एकलव्यने पैरोंके समीप जूते लाकर रख दिये। अवन्तीनरेशने अभिषेकके लिये अनेक प्रकारका जल एकत्र कर दिया। चेकितानने तृूणीर और काशिराजने धनुष अर्पित किया। शल्यने अच्छी मूठवाली तलवार तथा छींकेपर रखा हुआ सुवर्णभूषित कलश प्रदान किया
cekitāna upāsadle dhanuḥ kāśya upāharat | asiṃ ca sutsaruṃ śalyaḥ śaikyaṃ kāñcanabhūṣaṇam |
দুৰ্যোধনে ক’লে— “চেকিতান আগবাঢ়ি আহি ধনু উপহাৰ দিলে; কাশীৰ ৰজাইও ধনু অৰ্পণ কৰিলে। আৰু শল্যই উৎকৃষ্ট মুঠিযুক্ত তৰোৱাল আৰু থালত থোৱা সোণালংকৃত কলহ প্ৰদান কৰিলে।”
दुर्योधन उवाच