Dhṛtarāṣṭra–Duryodhana Saṃvāda on Restraint and Rājānīti
Chapter 50
शिशुपाल इवास्माकं गति: स्याज्नात्र संशय: । सपत्नेनावहासो मे स मां दहति भारत,उस समय वहाँ यदि मैं समर्थ होता तो भीमसेनको वहीं मार गिराता। राजन! यदि मैं भीमसेनको मारनेका उद्योग करता तो मेरी भी शिशुपालकी-सी ही दशा हो जाती; इसमें संशय नहीं है। भारत! शत्रुके द्वारा किया हुआ उपहास मुझे दग्ध किये देता है
śiśupāla ivāsmākaṃ gatiḥ syāj jñātra saṃśayaḥ | sapatnenāvahāso me sa māṃ dahati bhārata ||
দুৰ্যোধনে ক’লে—আমাৰ গতি শিশুপালৰ দৰে হ’ব—ইয়াত সন্দেহ নাই। হে ভাৰত, প্ৰতিদ্বন্দ্বীৰ উপহাসে মোক দহে।
दुर्योधन उवाच