Adhyāya 48 — Duryodhana’s Account of Tribute and the Provisioned Court (सभा पर्व, अध्याय ४८)
अहं तु तद् विजानामि विजेतुं येन शक््यते । युधिष्ठिरं स्वयं राजंस्तन्निबोध जुषस्व च,राजन! मैं वह उपाय जानता हूँ, जिससे युधिष्ठिर स्वयं पराजित हो सकते हैं। तुम उसे सुनो और उसका सेवन करो
ahaṁ tu tad vijānāmi vijetuṁ yena śakyate | yudhiṣṭhiraṁ svayaṁ rājan tan nibodha juṣasva ca ||
কিন্তু মই সেই উপায় জানো, যাৰ দ্বাৰা স্বয়ং ৰাজা যুধিষ্ঠিৰক পৰাজিত কৰিব পাৰি। হে ৰাজন, সেয়া ভালদৰে বুজা—শুনা আৰু তাক কাৰ্যত আন।
दुर्योधन उवाच