इस प्रकार श्रीमह्याभारत कर्णपर्वमें कर्ण और अजुनिका द्वैरथयुद्धविषयक नवासीवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥/ ८९ ॥ (दाक्षिणात्य अधिक पाठके ५३ लोक मिलाकर कुल १०२३ श्लोक हैं।) #१०3८६>> श्जु #+ नवतितमो< ध्याय: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना संजय उवाच ततः प्रयाता: शरपातमात्र- मवस्थिता: कुरवो भिन्नसेना: । विद्युत्प्रकाशं ददृशु: समन्ताद् धंनजयास्त्रं समुदीर्यमाणम्
sañjaya uvāca | tataḥ prayātāḥ śarapātamātram avasthitāḥ kuravo bhinnasenāḥ | vidyutprakāśaṃ dadṛśuḥ samantād dhanañjayāstraṃ samudīryamāṇam ||
সঞ্জয়ে ক’লে—তেতিয়া ভগ্নসেনা কৌৰৱসকলে পিছলৈ আঁতৰি গৈ কেৱল শৰপাতৰ পৰিসীমালৈকে থমকি ৰ’ল। তাতেই থিয় হৈ তেওঁলোকে চাৰিওফালে বিদ্যুৎসম দীপ্তি দিয়া ধনঞ্জয়ৰ অস্ত্ৰ উদ্গীৰিত হোৱাটো দেখিলে।
संजय उवाच