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Shloka 7

Adhyāya 8: Saṃprahāra-varṇana and Bhīma–Kṣemadhūrti Dvipa-Yuddha

Combat Description and Elephant Duel

इस प्रकार श्रीमह्ाभारत कर्णपर्वमें संजयवाक्यविषयक सातवाँ अध्याय पूरा हुआ,संचिन्त्य निपुणं बुद्धया धृतराष्ट्रो जनेश्वर: । नेदमस्तीति संचिन्त्य कर्णस्य समरे वधम्‌ वैशम्पायनजीने कहा--राजन्‌! कर्णका मारा जाना अद्भुत और अविश्वसनीय-सा लग रहा था। वह भयंकर कर्म उसी प्रकार समस्त प्राणियोंको मोहमें डालनेवाला था, जैसे मेरु पर्वतवका अपने स्थानसे हटकर अन्यत्र चला जाना। परम बुद्धिमान्‌ भृगुनन्दन परशुरामजीके चित्तमें मोह उत्पन्न होना जैसे सम्भव नहीं है, जैसे भयंकर कर्म करनेवाले देवराज इन्द्रका अपने शत्रुओंसे पराजित होना असम्भव है, जैसे महातेजस्वी सूर्यके आकाशसे पृथ्वीपर गिरने और अक्षय जलवाले समुद्रके सूख जानेकी बात मनमें सोचीतक नहीं जा सकती; पृथ्वी, आकाश, दिशा और जलका सर्वनाश होना एवं पाप तथा पुण्य-- दोनों प्रकारके कर्मोका निष्फल हो जाना जैसे आश्वर्यजनक घटना है; उसी प्रकार समरमें कर्ण-वधरूपी असम्भव कर्मको भी सम्भव हुआ सुनकर और उसपर बुद्धिद्वारा अच्छी तरह विचार करके राजा धृतराष्ट्र यह सोचने लगे कि “अब यह कौरवदल बच नहीं सकता। कर्णकी ही भाँति अन्य प्राणियोंका भी विनाश हो सकता है।” यह सब सोचते ही उनके हृदयमें शोककी आग प्रज्वलित हो उठी और वे उससे तपने एवं दग्ध-से होने लगे। उनके सारे अंग शिथिल हो गये। महाराज! वे अम्बिकानन्दन धृतराष्ट्र दीनभावसे लंबी साँस खींचने और अत्यन्त दुःखी हो “हाय! हाय!” कहकर विलाप करने लगे

saṃcintya nipuṇaṃ buddhyā dhṛtarāṣṭro janeśvaraḥ | nedam astīti saṃcintya karṇasya samare vadham ||

বৈশম্পায়নে ক’লে—তীক্ষ্ণ বুদ্ধিৰে নিপুণভাবে চিন্তা কৰি জনেশ্বৰ ধৃতৰাষ্ট্ৰে সমৰত কৰ্ণবধৰ কথা ভাবি মনতে ক’লে—“ই হ’ব নোৱাৰে; ই অসম্ভৱ।”

संचिन्त्यhaving reflected
संचिन्त्य:
Adhikarana
TypeVerb
Rootसम्-चिन्त्
Formल्यप् (क्त्वा-प्रत्ययार्थक अव्यय), कर्तरि, पूर्वकाल (absolutive)
निपुणम्skillfully / well
निपुणम्:
Karma
TypeAdjective
Rootनिपुण
Formनपुंसकलिङ्ग, द्वितीया, एकवचन
बुद्ध्याwith (his) intellect
बुद्ध्या:
Karana
TypeNoun
Rootबुद्धि
Formस्त्रीलिङ्ग, तृतीया, एकवचन
धृतराष्ट्रःDhṛtarāṣṭra
धृतराष्ट्रः:
Karta
TypeNoun
Rootधृतराष्ट्र
Formपुंलिङ्ग, प्रथमा, एकवचन
जन-ईश्वरःlord of people (king)
जन-ईश्वरः:
Karta
TypeNoun
Rootजन + ईश्वर
Formपुंलिङ्ग, प्रथमा, एकवचन
not
:
TypeIndeclinable
Root
इदम्this
इदम्:
Karta
TypePronoun
Rootइदम्
Formनपुंसकलिङ्ग, प्रथमा, एकवचन
अस्तिis / exists
अस्ति:
TypeVerb
Rootअस्
Formलट्, प्रथम, एकवचन, परस्मैपद
इतिthus (quotative)
इति:
TypeIndeclinable
Rootइति
संचिन्त्यhaving considered
संचिन्त्य:
Adhikarana
TypeVerb
Rootसम्-चिन्त्
Formल्यप् (क्त्वा-प्रत्ययार्थक अव्यय), कर्तरि, पूर्वकाल (absolutive)
कर्णस्यof Karṇa
कर्णस्य:
TypeNoun
Rootकर्ण
Formपुंलिङ्ग, षष्ठी, एकवचन
समरेin battle
समरे:
Adhikarana
TypeNoun
Rootसमर
Formपुंलिङ्ग, सप्तमी, एकवचन
वधम्killing / death
वधम्:
Karma
TypeNoun
Rootवध
Formपुंलिङ्ग, द्वितीया, एकवचन

वैशम्पायन उवाच

V
Vaiśampāyana
D
Dhṛtarāṣṭra
K
Karṇa
S
samara (battle)