Karna Reproves Shalya; Brahmin Reports on Bāhlīkas; Shalya’s Universalizing Rebuttal (कर्ण–शल्य संवादः)
अतिकान्तं हि यत् कार्य पश्चाच्चिन्तयते नर: । तच्चास्य न भवेत् कार्य चिन्तया च विनश्यति,संजयने कहा--राजन्! पूर्वकालमें आपने जो चद्यूतक्रीडा आदि धर्मसंगत कारण उपस्थित किये थे, उन्हें याद तो कीजिये। जो मनुष्य बीती हुई बातके लिये पीछे चिन्ता करता है, उसका वह कार्य तो सिद्ध होता नहीं, केवल चिन्ता करनेसे वह स्वयं नष्ट हो जाता है
atikāntaṁ hi yat kāryaṁ paścāc cintayate naraḥ | taccāsya na bhavet kāryaṁ cintayā ca vinaśyati ||
যি কাম ইতিমধ্যে হাতৰ পৰা ওলাই গৈছে, তাৰ বাবে যি মানুহে পিছত দুশ্চিন্তা কৰে, সেই কাম ন পুনৰ সিদ্ধ হয়, ন সলনি হয়; দুশ্চিন্তাই তাকেই বিনষ্ট কৰে।
संजय उवाच