Śalya’s Objection to Sārathya and Duryodhana’s Conciliation (शल्यमन्यु-प्रशमनम् / Sārathyāṅgīkāra)
हीनांश्नाभरणैश्नेव खलीनैश्व विवर्जितान् । चामरैश्न कुथाभिश्न तूणीरैः पतितैरपि,कितने ही घोड़ोंके उनकी छातीको छिपानेवाले कवच कटकर गिर गये थे, बालाबन्ध छिन्न-भिन्न हो गये थे, सोने, चाँदी और कांस्यके आभूषण नष्ट हो गये थे, दूसरे साज-बाज भी चौपट हो गये थे, उनके मुखोंसे लगाम भी निकल गये थे, चँवर, झूल और तरकस धराशायी हो गये थे तथा संग्रामभूमिमें शोभा पानेवाले उनके शूरवीर सवार भी मारे जा चुके थे। ऐसी दशामें रणभूमिमें भ्रान््त होकर भटकते हुए बहुत-से उत्तम घोड़ोंको हमने देखा था
hīnān aśnābharaṇaiś caiva khalīnaiś ca vivarjitān | cāmaraiś ca kuthābhiś ca tūṇīraiḥ patitair api ||
তেওঁলোক অলংকাৰহীন হৈছিল; মুখৰ পৰা খলীন (লগাম) সৰি গৈছিল; চামৰ, ঝুল আৰু তূণীৰো মাটিত পৰি আছিল।
संजय उवाच