धृतराष्ट्रस्य मूर्च्छा तथा द्रोणविषयकप्रश्नाः
Dhṛtarāṣṭra’s Fainting and Questions Concerning Droṇa
रक्षितारस्तत: शून्ये कच्चित् तैर्न हतः परै: । किन वीरोंने युद्धमें द्रोणाचार्यको उत्तम धैर्य प्रदान किया? उनकी रक्षा करनेवाले मूर्ख क्षत्रियोंने भयभीत होकर युद्धस्थलमें उन्हें अकेला तो नहीं छोड़ दिया? और इस प्रकार शत्रुओंने सूनेमें तो उन्हें नहीं मार डाला? ।। ४१ $ ।। न स पृष्ठमरेस्त्रासाद् रणे शौर्यात् प्रदर्शयेत्
dhṛtarāṣṭra uvāca | rakṣitārastataḥ śūnye kaccit tair na hataḥ paraiḥ | na sa pṛṣṭham arestrāsād raṇe śauryāt pradarśayet |
ধৃতৰাষ্ট্ৰ ক’লে—যেতিয়া ৰক্ষকসকল আঁতৰি গৈ তেওঁ একা পৰিল, তেতিয়া শত্রুসকলে কি তেওঁক নিৰ্জন অৱস্থাত আঘাত কৰি হত্যা কৰা নাইতো? কিয়নো বীৰ পুৰুষ শত্রুভয়ত ৰণত পিঠ নেদেখুৱায়; তেওঁ শৌৰ্যই প্ৰকাশ কৰে।
धृतराष्ट उवाच