Chapter 30: Formation Disruption, Competing War-Cries, and Nīla’s Fall
Droṇa-parva
(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ श्लोक मिलाकर कुल ५२ “लोक हैं।) अपन क्रात छा अर: अर्जुनके द्वारा भगदत्तका वध त्रिशो&्थ्याय: अर्जुनके द्वारा वृषबक और अचलका वध, शकुनिकी माया और उसकी पराजय तथा कौरव-सेनाका पलायन संजय उवाच प्रियमिन्द्रस्य सततं सखायममितौजसम् | हत्वा प्राग्ज्योतिषं पार्थ: प्रदक्षिणमवर्तत,संजय कहते हैं--राजन्! जो सदा इन्द्रके प्रिय सखा रहे हैं, उन अमित तेजस्वी प्राग्ज्योतिषपुरनरेश भगदत्तको मारकर अर्जुन दाहिनी ओर घूमे
sañjaya uvāca | priyam indrasya satataṁ sakhāyam amitaujasam | hatvā prāgjyotiṣaṁ pārthaḥ pradakṣiṇam avartata ||
সঞ্জয়ে ক’লে—ৰাজন! ইন্দ্ৰৰ সদাপ্ৰিয় সখা, অপাৰ তেজস্বী প্ৰাগ্জ্যোতিষৰ নৃপতি ভগদত্তক বধ কৰি পাৰ্থ অৰ্জুনে সোঁফালে ঘূৰি আগবাঢ়িল।
संजय उवाच