कर्मणा तेन पापेन श्वपाकं ब्राह्मणा इव । 'धृष्टद्युम्न! जैसे ब्राह्मण चाण्डालकी निन्दा करते हैं, उसी प्रकार ये समस्त पाण्डव उस पाप कर्मके कारण अत्यन्त घृणा प्रकट करते हुए तेरी निन्दा कर रहे हैं
karmaṇā tena pāpena śvapākaṃ brāhmaṇā iva |
সঞ্জয়ে ক’লে—ধৃষ্টদ্যুম্ন! সেই পাপকর্মৰ ফলত এই সকলো পাণ্ডৱ তীব্ৰ ঘৃণাৰে তোমাক নিন্দা কৰিছে; যেনেকৈ ব্ৰাহ্মণসকলে শ্বপাক (অন্ত্যজ)ক নিন্দা কৰে।
संजय उवाच