तमायान्तमनादृत्य दृष्ट्वा ग्रस्तं घटोत्कचम् । अलायुधेन समरे सिंहेनेव गवां पतिम्,आते हुए कर्णकी उपेक्षा करके समरांगणमें सिंहके चंगुलमें फँसे हुए साँड़की भाँति घटोत्कचको अलायुधका ग्रास बनते देख योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीमसेन सूर्यके समान तेजस्वी रथके द्वारा बाणसमूहोंकी वर्षा करते हुए अलायुधके रथकी ओर बड़े वेगसे बढ़े
tam āyāntam anādṛtya dṛṣṭvā grastaṃ ghaṭotkacam | alāyudhena samare siṃheneva gavāṃ patim ||
আহি থকা কৰ্ণক উপেক্ষা কৰি, সমৰত সিংহৰ চোয়ালত ধৰা ষাঁড়ৰ দৰে আলায়ুধে গ্ৰাস কৰা ঘটোৎকচক দেখি ভীমসেন তীব্ৰ বেগে আলায়ুধৰ ৰথৰ ফালে ধাৱমান হ’ল।
संजय उवाच