कर्ण-पाण्डव-संमर्दः — Karṇa and Arjuna’s Intensified Engagement
तमापततन्तं वेगेन रभसं पाण्डवर्षभम् | कर्ण: प्रत्युद्ययौ युद्धे मत्तो मत्तमिव द्विपम्,जैसे मतवाला हाथी दूसरे मतवाले हाथीपर धावा करता है, उसी प्रकार पाण्डवशिरोमणि वेगशाली भीमको वेगपूर्वक आक्रमण करते देख कर्ण भी युद्धस्थलमें उनका सामना करनेके लिये आगे बढ़ा
বেগে ধাৱিত হোৱা সেই প্ৰচণ্ড পাণ্ডৱশ্ৰেষ্ঠ ভীমক দেখি, যেনেকৈ মত্ত হাতী আন এটা মত্ত হাতীৰ ফালে ধাৱিত হয়, তেনেকৈ কৰ্ণো ৰণক্ষেত্ৰত তেওঁৰ সন্মুখীন হ’বলৈ আগবাঢ়িল।
संजय उवाच